पश्चिम बंगाल के रानीगंज में एक कोलोनी की महिलाओं का सब्र टूट गया है। भयंकर प्रदूषण से तंग आकर उन्होंने न सिर्फ सड़कों पर उतरकर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया, बल्कि आने वाले चुनाव में वोट न देने का ऐलान भी कर दिया है। उनका कहना है साफ हवा नहीं मिलेगी तो वोट भी नहीं देंगे।
थाली में राख और फेफड़ों में जहर
रानीगंज के बकतार नगर इलाके की दामोदर कॉलोनी में रहने वाले लोगों का जीवन नारकीय बन गया है। यहां हवा में हमेशा धूल और काली राख के कण मौजूद रहते हैं। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही गुड़िया मालाकार ने बताया कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह बर्बाद हो गई है। सुबह उठते ही खाने की थाली में धूल और राख गिरती है। लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है और उनके फेफड़ों में जहर भरता जा रहा है।
'रणचंडी' बनकर उतरीं महिलाएं
इस हालात से तंग आकर स्थानीय महिलाओं ने 'रणचंडी' का रूप धारण कर लिया। उन्होंने सड़कों पर उतरकर चक्का जाम कर दिया। उनका गुस्सा साफ दिख रहा था। महिलाओं ने कहा कि वो इंसान नहीं, बल्कि नरक के कीड़े-मकोड़ों जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं। उनकी शिकायतों को लगातार अनसुना किया जा रहा है, जिससे उनका धैर्य अब टूट गया है।
वोट बहिष्कार का ऐलान
इस विरोध प्रदर्शन की सबसे बड़ी बात यह रही कि महिलाओं ने राजनीतिक रास्ता अपनाया। उन्होंने आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने की घोषणा कर दी। उनका साफ नारा है - "साफ हवा नहीं, तो वोट नहीं।" यह कदम दिखाता है कि जब बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलतीं, तो लोग वोट जैसे लोकतांत्रिक हथियार का इस्तेमाल करने लगते हैं।
हमारी बात: प्रदूषण अब राजनीतिक मुद्दा बना
रानीगंज की यह घटना एक बड़ा संदेश देती है। प्रदूषण अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह सीधे लोकतंत्र और राजनीति से जुड़ गया है। जब लोगों के थाल में राख गिरेगी और सांस लेना मुश्किल होगा, तो वो चुनावी वादों पर भरोसा कैसे करेंगे? महिलाओं का यह विरोध दिखाता है कि विकास के नाम पर हो रही लापरवाही की कीमत आम लोग चुका रहे हैं। अगर सरकारें समय रहते इन मुद्दों पर ध्यान नहीं देंगी, तो 'वोट बहिष्कार' जैसे कदम आम होते जाएंगे। यह सिर्फ रानीगंज की नहीं, बल्कि देश के उन सभी इलाकों की कहानी है जहां प्रदूषण लोगों की जिंदगी को नर्क बना रहा है।
स्रोत
- रानीगंज प्रदूषण विरोध ग्राउंड रिपोर्ट — Vidrohi24