सरायकेला में आयोजित राजकीय चैत्र पर्व और छऊ महोत्सव का भव्य समापन हो गया। तीन दिनों तक चले इस सांस्कृतिक आयोजन का अंतिम दिन रात्रि जागरण और छऊ नृत्य की शानदार प्रस्तुतियों के साथ संपन्न हुआ। दर्शकों की भारी भीड़ ने कलाकारों का जोरदार स्वागत किया।
रात भर चला कार्यक्रम, छऊ ने बांधा समां
समापन समारोह की शुरुआत मंगलाचरण के साथ हुई। इसके बाद रात भर चले कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण सरायकेला शैली का छऊ नृत्य रहा। प्रभात खबर के मुताबिक, राजकीय छऊ कला केंद्र, केदार आर्ट सेंटर और कुश कारवा छऊ केंद्र के कलाकारों ने अपनी कला की सतरंगी छटा बिखेरी। छऊ की अद्भुत प्रस्तुतियों को देखने के लिए स्टेडियम में दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी रही।
कलाकारों ने दिखाया हुनर, दर्शक रहे मंत्रमुग्ध
इस आयोजन में बड़ी संख्या में दर्शकों की उपस्थिति रही, जिन्होंने तालियों की गूंज से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। इंस्टाग्राम पर शेयर की गई जानकारी के अनुसार, कलाकारों ने सांस्कृतिक जादू बिखेरा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में फैमिली जज वीरेश कुमार, जिला परिषद अध्यक्ष सोनाराम बोदरा और नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज चौधरी उपस्थित थे।
"छऊ हमारी सांस्कृतिक धरोहर है।" — प्रभात खबर
आयोजन में उठी स्थानीय कलाकारों की अनदेखी की आवाज
हालांकि यह आयोजन सफल रहा, लेकिन इसके दौरान एक विवाद भी सामने आया। रफ्तार मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सरायकेला में आयोजित इस राजकीय चैत्र पर्व सह छऊ महोत्सव में स्थानीय कलाकारों की अनदेखी पर बवाल हुआ है और जांच की मांग उठी है। यह मामला आयोजन के एक अलग पहलू को दर्शाता है।
Hamaari Baat: संस्कृति बचाने के साथ-साथ कलाकारों का भी ख्याल जरूरी
सरायकेला का छऊ नृत्य दुनिया भर में मशहूर है और ऐसे आयोजन इसकी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी हैं। यह अच्छी बात है कि दर्शकों ने भारी संख्या में आकर कलाकारों का हौसला बढ़ाया। लेकिन, अगर स्थानीय कलाकारों के साथ अनदेखी की शिकायत सच है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। सरकार और आयोजकों को सिर्फ एक भव्य कार्यक्रम करके खुश नहीं हो जाना चाहिए। असली मकसद तो इस कला और इसके वाहक यानी कलाकारों को संरक्षण और सम्मान देना है। अगर घर के कलाकार ही नाराज होंगे, तो यह विरासत कैसे बचेगी? आयोजनों की सफलता सिर्फ भीड़ से नहीं, बल्कि हर स्थानीय कलाकार के चेहरे पर मुस्कान से आंकी जानी चाहिए।
Sources & References
- Seraikela Chhau Festival Concludes — प्रभात खबर
- सरायकेला छऊ महोत्सव — instagram.com
- Uproar Over Neglect of Local Artists — raftaarmedia.com