झारखंड के सरायकेला में आयोजित ऐतिहासिक चैत्र महोत्सव सह छऊ महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या बॉलीवुड की मशहूर पार्श्व गायिका सोना महापात्र के नाम रही। अपनी बेबाक गायकी और सुरीली आवाज के लिए जानी जाने वाली सोना ने हिंदी और ओड़िया गीतों के मिश्रण से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सोना महापात्रा का 'मैजिक' और 'रंगावती' का जादू
इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में सोना महापात्रा ने अपनी प्रस्तुति से पूरे माहौल में जान डाल दी। प्रभात खबर के मुताबिक, 'रंगावती' की धुन पर पूरा शहर झूम उठा। उन्होंने 'जोहार झारखंड' कहकर भी लोगों का दिल जीत लिया। यह कार्यक्रम सरायकेला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने वाला एक बड़ा आयोजन था।
छऊ नृत्य और वॉरियर स्पिरिट का संगम
यह महोत्सव सिर्फ एक संगीत कार्यक्रम नहीं, बल्कि झारखंड की प्राचीन परंपरा 'छऊ' नृत्य और वॉरियर स्पिरिट को समर्पित था। इंस्टाग्राम पर सोना महापात्रा ने खुद एक वीडियो में कहा, "सरायकेला, झारखंड की मिट्टी। जहाँ से छऊ जैसे प्राचीन नृत्य की कहानी शुरू होती है। वॉरियर स्पिरिट, माइथोलॉजी, कल्चर और मोमेंट का एक जीता जागता रूप। नमस्कार झारखंड।"
इस आयोजन को लेकर सोशल मीडिया पर काफी उत्साह देखने को मिला। फेसबुक पर सरायकेला के डिप्टी कमिश्नर के पेज से शेयर किए गए एक वीडियो में इसे "छऊ नृत्य की प्राचीन परंपरा, वॉरियर स्पिरिट और संगीत का अद्भुत संगम" बताया गया।
हमारी बात: सांस्कृतिक विरासत को बचाने की जरूरत
सीधी बात कहें तो, सरायकेला में सोना महापात्रा जैसी बड़ी कलाकार का आना एक सकारात्मक कदम है। यह सिर्फ एक कॉन्सर्ट नहीं, बल्कि छऊ जैसी लुप्त होती कला को मुख्यधारा में लाने का प्रयास है। जब बॉलीवुड का नाम जुड़ता है, तो लोगों का ध्यान आकर्षित होता है।
हमारी नजर में, झारखंड जैसे राज्यों की समृद्ध लोक कला और संस्कृति को बचाने के लिए इस तरह के आयोजन बहुत जरूरी हैं। सोना महापात्रा ने न सिर्फ गाने गाए, बल्कि 'जोहार झारखंड' कहकर स्थानीय लोगों से जुड़ने की कोशिश की। यही वह भावना है जो किसी भी सांस्कृतिक कार्यक्रम को सफल बनाती है। अब जरूरत है कि यह मोमेंट सिर्फ एक शो तक सीमित न रहे, बल्कि छऊ नृत्य और झारखंड की अन्य कलाओं को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास जारी रहें।