पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान शुरू हो गया है। इस बार की खास बात यह है कि चुनाव आयोग ने 85 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं के लिए घर बैठे वोट डालने की सुविधा शुरू की है। आयोग के अधिकारी और कर्मचारी सुबह से ही मतपेटियां और बैलेट पेपर लेकर मतदाताओं के घरों तक पहुंच रहे हैं।
कैसे हो रही है घर-घर वोटिंग की प्रक्रिया?
चुनाव आयोग की यह पहल उन मतदाताओं के लिए है जो बुजुर्ग हैं या फिर शारीरिक रूप से चुनाव केंद्र तक जाने में असमर्थ हैं। प्रभात खबर की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग के प्रतिनिधि और मतदानकर्मी मतपेटियों और दूसरी जरूरी सामग्री के साथ सीधे मतदाताओं के घर पहुंच रहे हैं। वहां मतदाता अपना वोट बैलेट पेपर पर डालते हैं और फिर उसे मतपेटी में डाल दिया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया मताधिकार के नियमों के तहत की जा रही है।
पुरुलिया में पड़ा पहला वोट, झूनी बाउरी ने किया मतदान
इस प्रक्रिया के तहत पहला वोट पुरुलिया जिले में डाला गया। प्रभात खबर की रिपोर्ट बताती है कि पुरुलिया विधानसभा के छररा ग्राम पंचायत के 34 नंबर मतदान केंद्र के तहत आने वाली एक दिव्यांग महिला झूनी बाउरी ने अपना वोट डाला। करीब 40 साल की झूनी के घर मंगलवार की सुबह चुनाव आयोग के अधिकारी पहुंचे और उन्होंने घर पर ही मतदान किया।
यह प्रक्रिया सोमवार से ही शुरू हो गई थी। आयोग के कर्मचारी लगातार मतदाताओं के घर जाकर उनके वोट रिकॉर्ड कर रहे हैं। इसका मकसद है कि जो लोग चुनाव केंद्र नहीं आ पाते, उनकी आवाज भी दर्ज हो सके।
किन नियमों के तहत मिलती है यह सुविधा?
चुनाव आयोग ने फैसला किया है कि 85 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाता इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। हालांकि, इसके लिए उन्हें पहले आवेदन करना होता है। आवेदन आने के बाद ही उनके घर मतदान की व्यवस्था की जाती है। यह पूरी तरह से ऑप्शनल सुविधा है। जो लोग चुनाव केंद्र पर जाकर वोट डालना चाहते हैं, वे ऐसा कर सकते हैं।
हमारी बात: मताधिकार को सही मायने देने वाला कदम
चुनाव आयोग की यह पहल सही दिशा में एक कदम है। लोकतंत्र की असली ताकत तभी है जब हर एक वोटर, चाहे उसकी उम्र हो या शारीरिक स्थिति, बिना किसी दिक्कत के अपना वोट डाल सके। घर-घर जाकर वोट लेना उन लोगों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है जो सालों से चुनाव केंद्र तक की दूरी तय नहीं कर पाते थे।
लेकिन, इस प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना सबसे जरूरी है। आयोग को यह सुनिश्चित करना होगा कि घर पर वोट डालने की प्रक्रिया में किसी तरह का दबाव या गड़बड़ी न हो। सुरक्षा और गोपनीयता का पूरा ख्याल रखा जाए। अगर यह प्रक्रिया साफ-सुथरी रही, तो यह भारत के चुनावी इतिहास में एक अच्छा उदाहरण बनेगी और दूसरे राज्यों के लिए भी रास्ता दिखाएगी। आखिरकार, लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब हर नागरिक की भागीदारी सुनिश्चित हो।
Sources & References
- WB Assembly Election 2026 Voting Report — Prabhat Khabar