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India Apr 15, 2026 · min read

Jharkhand Excise Constable Scandal New Mobile Phone Bribery Video

झारखंड उत्पाद सिपाही पेपर लीक मामले में गिरफ्तार आरोपियों को कोर्ट ले जाते वक्त पुलिस के सरकारी चालक ने एक आरोपी को मोबाइल फोन दिया और पैसे लिए। वीडियो वायरल होने पर पुलिस ने जांच का दावा किया।

ISHRAFIL KHAN

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AI News

Jharkhand Excise Constable Scandal New Mobile Phone Bribery Video

TL;DR — Quick Summary

झारखंड उत्पाद सिपाही पेपर लीक मामले में, आरोपियों को कोर्ट ले जा रही बस में एक पुलिस चालक ने एक आरोपी को मोबाइल फोन थमाकर पैसे लिए। यह वीडियो वायरल हो गया है, जिस पर पुलिस ने आंतरिक जांच का दावा किया है।

Key Facts
मामला
झारखंड उत्पाद सिपाही (JSSC Excise Constable) पेपर लीक और सॉल्वर गैंग
गिरफ्तार आरोपी
166
घटना
आरोपियों को कोर्ट ले जाते वक्त बस में
आरोप
पुलिस का सरकारी चालक आरोपी से पैसे लेकर मोबाइल इस्तेमाल की अनुमति दी
स्थिति
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, आधिकारिक पुष्टि नहीं
पुलिस कार्रवाई
सिटी एसपी ने आंतरिक जांच कराने का दावा किया

झारखंड के उत्पाद सिपाही भर्ती घोटाले में एक नया विवाद सामने आया है। जब इस मामले में गिरफ्तार 166 आरोपियों को कोर्ट ले जाया जा रहा था, तब पुलिस के एक सरकारी चालक पर आरोप लगा है कि उसने एक आरोपी को मोबाइल फोन इस्तेमाल करने दिया और बदले में पैसे लिए। इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसने सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या हुआ था वायरल वीडियो में?

घटना तब की है जब उत्पाद सिपाही पेपर लीक और सॉल्वर गैंग मामले के आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच बस से कोर्ट ले जाया जा रहा था। प्रभात खबर की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी दौरान पुलिस का एक सरकारी चालक कथित तौर पर एक आरोपी से पैसे लेता है और बदले में उसे मोबाइल फोन से बात करने की अनुमति देता है। वीडियो में यह सब कैद हो गया। हालांकि, इस वीडियो की आधिकारिक तौर पर स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे यह सवाल जरूर उठ गया है कि गिरफ्तार आरोपियों के साथ ऐसी गतिविधि कैसे हो सकती है।

पुलिस ने क्या कहा? 'मानवीय घटना' का दावा

वीडियो वायरल होने और मामले ने तूल पकड़ने के बाद सिटी एसपी पारस राणा ने पुलिस का पक्ष रखा। प्रभात खबर के अनुसार, सिटी एसपी ने इसे एक 'मानवीय घटना' बताया। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो की आंतरिक जांच कराई गई है। पुलिस का यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि वह घटना को गंभीरता से ले रही है, लेकिन उसे एक अलग नजरिए से देखने की कोशिश भी कर रही है।

"जांच में यह तथ्य..." — प्रभात खबर

इस पूरे प्रकरण ने दो बड़े सवाल खड़े किए हैं। पहला, क्या गिरफ्तार व्यक्ति को, चाहे वह किसी भी मामले का आरोपी हो, पुलिस की हिरासत में इस तरह मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने देना चाहिए? दूसरा, अगर पुलिसकर्मी या उसका चालक ऐसा कर भी रहा है, तो क्या उसके पीछे पैसे लेने की मंशा जायज है?

हमारी बात: यह 'मानवीयता' नहीं, गंभीर लापरवाही है

सीधी बात कहें तो यह घटना चौंकाने वाली है। एक बड़े भर्ती घोटाले के आरोपी, जिन पर पेपर लीक और सॉल्वर गैंग चलाने के गंभीर आरोप हैं, उन्हें कोर्ट ले जाने के दौरान मोबाइल फोन मिल जाए, यह सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी विफलता है। पुलिस का इसे 'मानवीय घटना' कहना भी समझ से परे है। मानवीयता का मतलब पानी पिलाना या जरूरी सहायता देना हो सकता है, पैसे लेकर मोबाइल देना नहीं।

यह वीडियो सिर्फ एक चालक की हरकत नहीं दिखाता, बल्कि पूरी प्रक्रिया में बैठी लापरवाही को उजागर करता है। अगर एक आरोपी को बस में बैठे-बैठे फोन मिल सकता है, तो यह सोचना डरावना है कि हिरासत में और क्या-क्या हो सकता है। पुलिस को सिर्फ आंतरिक जांच का ऐलान करने के बजाय, इस पूरे प्रकरण की पारदर्शी और कड़ी जांच करनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। जनता का पुलिस पर भरोसा ऐसी घटनाओं से ही टूटता है।

Sources & References

  1. JSSC Excise Constable Case Report — Prabhat Khabar
ISHRAFIL KHAN

Written by

ISHRAFIL KHAN

Senior Reporter