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India Apr 16, 2026 · min read

Jharkhand Salary Crisis Hits 12 Departments Due Election Duty

झारखंड में चुनाव ड्यूटी पर गए आईएएस सचिवों की अनुपस्थिति और कुबेर पोर्टल की खराबी से 12 विभागों के कर्मचारियों का वेतन भुगतान लंबित। पूरी खबर।

ISHRAFIL KHAN

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AI News

Jharkhand Salary Crisis Hits 12 Departments Due Election Duty

TL;DR — Quick Summary

झारखंड में चुनावी ड्यूटी पर गए कई विभागों के सचिवों की अनुपस्थिति और कुबेर पोर्टल की तकनीकी खराबी के कारण करीब 12 विभागों के कर्मचारियों का वेतन भुगतान अटका हुआ है।

Key Facts
प्रभावित विभाग
करीब 12 विभाग
मुख्य कारण 1
सचिवों की चुनाव ड्यूटी
मुख्य कारण 2
कुबेर पोर्टल की तकनीकी खराबी
प्रभावित कर्मचारी
कई विभागों के कर्मचारी
समस्या
वेतन मद में राशि का आवंटन नहीं हो पाया

झारखंड में एक बड़ा वेतन संकट खड़ा हो गया है। राज्य के करीब 12 विभागों के कर्मचारियों को उनका वेतन समय पर नहीं मिल पा रहा है। इसकी दो बड़ी वजहें हैं - चुनावी ड्यूटी पर गए आईएएस सचिव और सरकारी कुबेर पोर्टल की तकनीकी खराबी।

चुनाव ड्यूटी ने पैदा की मुश्किल

राज्य के उत्पाद, वन, कृषि, खाद्य आपूर्ति, कल्याण, ऊर्जा और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों के सचिव चुनावी कार्यों में व्यस्त हैं। ये अधिकारी मार्च के अंत या अप्रैल की शुरुआत से ही चुनाव ड्यूटी पर हैं। नियमों के मुताबिक, सचिवों की अनुपस्थिति में वेतन के लिए राशि का आवंटन जारी नहीं हो सका। इसी वजह से कर्मचारियों की सैलरी लंबित हो गई है।

कुबेर पोर्टल की खराबी ने बढ़ाई परेशानी

वेतन भुगतान में देरी की एक और बड़ी वजह राज्य सरकार का 'कुबेर पोर्टल' है। वित्तीय वर्ष की समाप्ति और नए वर्ष की शुरुआत के दौरान पोर्टल पर लोड बढ़ने के कारण तकनीकी समस्याएं आईं। पोर्टल के सुचारु रूप से काम न करने की वजह से विभागों को वित्तीय प्रक्रियाएं पूरी करने में दिक्कत हो रही है।

किन विभागों के कर्मचारी प्रभावित?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 12 विभागों के कर्मचारी इस वेतन संकट से जूझ रहे हैं। इनमें उत्पाद, वन, कृषि, खाद्य आपूर्ति, कल्याण, ऊर्जा और ग्रामीण विकास विभाग शामिल हैं। इन सभी विभागों के सचिव चुनाव ड्यूटी पर हैं, जिससे वेतन जारी करने की प्रक्रिया रुकी हुई है।

हमारी बात: प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता

यह केस साफ दिखाता है कि हमारी प्रशासनिक व्यवस्था कितनी नाजुक है। एक तरफ चुनाव जैसे लोकतांत्रिक कार्य हैं, दूसरी तरफ सरकारी कर्मचारियों का वेतन। दोनों के बीच तालमेल की कमी सामने आई है। सवाल यह है कि क्या चुनाव ड्यूटी पर जाने वाले अधिकारियों के विकल्प की कोई व्यवस्था नहीं थी? क्या वेतन जारी करने की प्रक्रिया सिर्फ एक व्यक्ति पर निर्भर होनी चाहिए?

दूसरा मुद्दा तकनीकी है। कुबेर पोर्टल जैसे डिजिटल सिस्टम बनाए ही इसलिए जाते हैं कि काम आसान हो। लेकिन साल के अंत में लोड बढ़ने पर सिस्टम फेल हो जाता है, यह गंभीर चूक है। सरकार को तुरंत दो काम करने चाहिए - पहला, वैकल्पिक व्यवस्था से कर्मचारियों का वेतन जारी करना। दूसरा, अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना ताकि भविष्य में ऐसी समस्या न आए। कर्मचारियों का वेतन उनका बुनियादी अधिकार है, उसे चुनावी प्रक्रिया या तकनीकी खराबी का शिकार नहीं होना चाहिए।

Sources & References

  1. झारखंड वेतन संकट रिपोर्ट — मूल रिपोर्ट
ISHRAFIL KHAN

Written by

ISHRAFIL KHAN

Senior Reporter