झारखंड हाईकोर्ट ने जमशेदपुर के चर्चित बागबेड़ा नागाडीह मॉब लिंचिंग मामले के आरोपी डॉ. टुडू को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका मंजूर कर ली है। डॉ. टुडू लंबे समय तक पुलिस को चकमा देने के बाद निचली अदालत में सरेंडर करने के बाद से जेल में बंद था।
क्या था नागाडीह मॉब लिंचिंग मामला?
यह मामला 18 मई 2017 का है, जब जमशेदपुर के बागबेड़ा इलाके के नागाडीह गांव में बच्चा चोरी की झूठी अफवाह ने हिंसक रूप ले लिया था। उग्र भीड़ ने विकास कुमार वर्मा, उनके भाई गौतम कुमार वर्मा और उनके दोस्त गंगेश की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। बचाव करने आईं विकास की दादी रामसखी देवी भी इस हमले में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। बाद में इलाज के दौरान टीएमएच (टाटा मेन हॉस्पिटल) में उनकी भी मौत हो गई थी। इस तरह इस एक घटना में चार लोगों की जान चली गई थी।
डॉ. टुडू को क्यों मिली राहत?
हाईकोर्ट ने डॉ. टुडू की जमानत याचिका मंजूर करते हुए उसे राहत प्रदान की है। हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया है कि डॉ. टुडू पर इसी घटना से जुड़ा एक अन्य मामला अब भी लंबित है। यानी जमानत मिलने के बाद भी वह पूरी तरह से इस केस से बाहर नहीं है।
हमारी बात: न्याय की राह में अब भी बाकी है सवाल
नागाडीह मॉब लिंचिंग मामला झारखंड के सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक है। बच्चा चोरी की झूठी अफवाह पर चार मासूम लोगों की जान चली गई थी। ऐसे में डॉ. टुडू को जमानत मिलना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन पीड़ित परिवारों के लिए यह एक और झटका हो सकता है। हालांकि, कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया है कि उस पर एक और मामला लंबित है, जिसमें आगे की सुनवाई होगी। हमारी नजर में, इस केस की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
Sources & References
- जमशेदपुर: नागाडीह मॉब लिंचिंग मामले के आरोपी डॉ. टुडू को हाईकोर्ट से मिली राहत — आनंद कुमार की रिपोर्ट