बिहार के कजरा में स्थित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह है डॉक्टर की गैरमौजूदगी और मरीजों का कथित रूप से मोबाइल फोन पर इलाज किया जाना। यह मामला बुधवार को सामने आया, जब अस्पताल का जायजा लिया गया।
कजरा अस्पताल में क्या हुआ?
बुधवार को जब अस्पताल का निरीक्षण किया गया, तो वहां ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. नलिनी नयन मौजूद नहीं थे। अस्पताल में सिर्फ लैब टेक्नीशियन प्रकाश पासवान, ऑपरेटर दीपक कुमार, पुरुष गार्ड बबलू राम और महिला गार्ड शबनम कुमारी मौजूद मिले। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, डॉक्टर के न होने पर मरीजों का इलाज मोबाइल फोन के जरिए किया गया। इस बात ने ग्रामीणों को नाराज कर दिया है।
ग्रामीणों की नाराजगी और सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर ही मौजूद नहीं रहेंगे, तो गरीब और जरूरतमंद मरीज कहां जाएंगे। उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, यह कोई पहली बार नहीं है, बल्कि अस्पताल में पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं।
प्रभारी और चिकित्सक के बयानों में विरोधाभास
इस पूरे मामले में प्रभारी और चिकित्सक के बयानों में विरोधाभास सामने आया है। एक तरफ जहां डॉक्टर की गैरमौजूदगी की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी तरफ अधिकारियों के बयान अलग हैं। यह विरोधाभास मामले को और गंभीर बना रहा है।
हमारी बात: कजरा अस्पताल का मामला क्यों है चिंताजनक?
हमारी नजर में यह मामला सिर्फ एक अस्पताल तक सीमित नहीं है। यह पूरे सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की खामियों को उजागर करता है। जब डॉक्टर ही ड्यूटी पर नहीं आते, तो मरीजों का क्या होगा? फोन पर इलाज करना किसी भी हालत में सही नहीं ठहराया जा सकता। ग्रामीणों की नाराजगी जायज है। सरकार को इस मामले की गंभीर जांच करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। वरना गरीब मरीजों का भरोसा सरकारी अस्पतालों से उठता जाएगा।
Sources & References
- कजरा अस्पताल में फोन पर इलाज — Vidrohi24